Monday, 14 June 2021

कोरोना आपदा या अवसर

कोरोना आपदा नहीं अवसर 

कोरोना का कहर पूरे भारत पर देखने को मिला। हजारों बच्चों ने अपने मां-बाप को खो दिया ।श्मशान ,कब्रिस्तान लोगों से भर गया। किसी को तो सड़क पर फेंक दिया गया जिन का अंतिम संस्कार वहां की पुलिस वालों ने कराया ।बीते 1 महीने मे स्थिति भयावह हो गई लेकिन सबके घर वालों का एक सा आरोप  है कि उनके पीड़ितों का इलाज सही से नहीं हो पाया। कोरोना मरीजों के परिजनों का कहना है उनके पीड़ितों का इलाज बहुत ही लापरवाही से हुआ ।ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए कई अस्पतालों ने अपने फीस को बढ़ा दिया मेडिकल चार्जेस मनमानी ढंग से लगाया गया ।सिर्फ 2 से 3 दिन में उनके पीड़ितों को इतनी दवाएं चढ़ाई गई कि जितना कि अगर फेफड़े की बीमारी वाले मरीजों को चढ़ाई जाए तो वह मर जाएगा ।सिर्फ 2 से 3 दिन मे डॉक्टरों ने लोगों से लाखों रुपए वसूल किए ।अगर यह मर्ज महामारी है तो क्या महामारी के इलाज में इतना रुपए लगना सही है ।पीड़ितों को भर्ती कोरोना के नाम पर किया जा रहा है लेकिन मृत्यु के बाद उनका डेथ सर्टिफिकेट पर दूसरे फेफड़े की बीमारी दिखा दिखाया जा रहा है ।जब उनसे परिजन बहस कर रहे हैं तो वह कह रहे हैं की सीटी स्कैन एंटीजन प्राइवेट का मान्य नहीं है। यानी जिन परिजनों को सरकार की तरफ से कोरोना पीड़ितों को लाभ दिया जाएगा वह लाभ नहीं ले पाएंगे क्योंकि उनकी मृत्यु प्रमाण पत्र में यह लिखा ही नहीं गया कि वह कोरोना से मरे हैं। आखिर सरकार इस पर क्यों कुछ नहीं बोल रही है क्या यह विषय गंभीर और सोचनीय नहीं है ।क्या इससे भारत के लोगों पर या उससे जुड़े लोगों पर कोई फर्क नहीं पड़ता ।क्या जिन लोगों ने अपना मां बाप कोरोना जैसी महामारी की वजह से खोया क्या वह इसके मुआवजे के हकदार नहीं है ।मृत्यु प्रमाण पत्र में क्यों डॉक्टर कोरोना दिखाने में इतना डर रहा है जबकि उसने भर्ती इसी आधार पर  किया था और इसी आधार को मान करके उसने दवाइयां भी चलाई थी।

बेरोजगार युवा

 नौकरी पाने के लिए जूझते छात्र एवं छात्राएं

आज के युग में भारत के छात्र-छात्राओं नौकरी पाने के लिए उन्हें किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और उसके बावजूद भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हो पा रहा है ।घर बैठे मां बाप ,रिश्तेदार देखते देखते वह भी  कह रहे हैं लड़को की पढ़ते-पढ़ते उम्र होती जा रही है लेकिन वह अभी तक कमाने के योग्य नहीं हो पाया। मां बाप ने अपना सारा पैसा उनके पढ़ाई के ऊपर लगा दिया लेकिन 10 12 सालों के बाद उन्हें यह पता चला कि इस पढ़ाई से भी उनको रोजगार नहीं मिल पा रहा है इन परिस्थितियों का सामना मां-बाप तो कर ही रहे हैं साथ-साथ उनके बच्चे भी कर रहे हैं ।यह एक तरीके से एक बड़ा बोझ होता जा रहा है जो कि आज हर एक युवा को सोचने पर मजबूर कर दिया है ।पड़ोसियों के ताने सुनने की आदत हो गई है ।और अब तो मां-बाप भी कहते हैं बेटा ऐसे पढ़ाई से क्या फायदा और लड़के भी कहते हैं कि मां-बाप तुमने मुझे पढ़ाया क्यों था। इतनी कठिनाइयां ही जब थी तुम मुझे इस क्षेत्र में डाला ही क्यों था ।एक 1000 सीट के लिए 5 लाख ,1000000 लोग बैठते हैं उनमें से कुछ लोगों का जुगाड़ भी रहता है। कौन सी चीजें ऐसी हुई जिन चीजों ने हम लोगों को यह सोचने को मजबूर कर दिया ।कौन सी ऐसी गलती हुई जिसका भुगतान हम सबको अदा करना पड़ रहा है। यह कहावत है जो हम बोते हैं वह काटते हैं लेकिन हम लोगों ने तो हमेशा अपने भविष्य के लिए अच्छा ही कार्य किया अपने भविष्य के लिए अच्छा बोया तो आज फिर यह सब क्यों हमें देखने को मिल रहा यह हम सभी भारतीय नागरिकों को बहुत गंभीरता से सोचना होगा। कभी  किसान के साथ अन्याय कभी युवाओं के साथ अन्याय और यह दोनों ही हमारे देश के भविष्य हैं और हमारी अर्थव्यवस्था हैं।

Friday, 11 June 2021

Hii Friends.

हेलो दोस्तों आप सब कैसे हैं उम्मीद करता हूं आप सब अच्छे होंगे और जो लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं उनके लिए मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं ईश्वर उनको हिम्मत दे और उनकी समस्याओं का समाधान कर दे।
https://youtu.be/IN6LNpRQA70

कोरोना आपदा या अवसर

कोरोना आपदा नहीं अवसर  कोरोना का कहर पूरे भारत पर देखने को मिला। हजारों बच्चों ने अपने मां-बाप को खो दिया ।श्मशान ,कब्रिस्तान लोगों से भर गय...