नौकरी पाने के लिए जूझते छात्र एवं छात्राएं
आज के युग में भारत के छात्र-छात्राओं नौकरी पाने के लिए उन्हें किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और उसके बावजूद भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हो पा रहा है ।घर बैठे मां बाप ,रिश्तेदार देखते देखते वह भी कह रहे हैं लड़को की पढ़ते-पढ़ते उम्र होती जा रही है लेकिन वह अभी तक कमाने के योग्य नहीं हो पाया। मां बाप ने अपना सारा पैसा उनके पढ़ाई के ऊपर लगा दिया लेकिन 10 12 सालों के बाद उन्हें यह पता चला कि इस पढ़ाई से भी उनको रोजगार नहीं मिल पा रहा है इन परिस्थितियों का सामना मां-बाप तो कर ही रहे हैं साथ-साथ उनके बच्चे भी कर रहे हैं ।यह एक तरीके से एक बड़ा बोझ होता जा रहा है जो कि आज हर एक युवा को सोचने पर मजबूर कर दिया है ।पड़ोसियों के ताने सुनने की आदत हो गई है ।और अब तो मां-बाप भी कहते हैं बेटा ऐसे पढ़ाई से क्या फायदा और लड़के भी कहते हैं कि मां-बाप तुमने मुझे पढ़ाया क्यों था। इतनी कठिनाइयां ही जब थी तुम मुझे इस क्षेत्र में डाला ही क्यों था ।एक 1000 सीट के लिए 5 लाख ,1000000 लोग बैठते हैं उनमें से कुछ लोगों का जुगाड़ भी रहता है। कौन सी चीजें ऐसी हुई जिन चीजों ने हम लोगों को यह सोचने को मजबूर कर दिया ।कौन सी ऐसी गलती हुई जिसका भुगतान हम सबको अदा करना पड़ रहा है। यह कहावत है जो हम बोते हैं वह काटते हैं लेकिन हम लोगों ने तो हमेशा अपने भविष्य के लिए अच्छा ही कार्य किया अपने भविष्य के लिए अच्छा बोया तो आज फिर यह सब क्यों हमें देखने को मिल रहा यह हम सभी भारतीय नागरिकों को बहुत गंभीरता से सोचना होगा। कभी किसान के साथ अन्याय कभी युवाओं के साथ अन्याय और यह दोनों ही हमारे देश के भविष्य हैं और हमारी अर्थव्यवस्था हैं।
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